नई दिल्ली: तीन राज्यों की विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के नतीजों ने भारतीय जनता पार्टी के लिए मिले-जुले संकेत दिए हैं। बिहार की बांकीपुर और मध्य प्रदेश की दतिया सीट पर पार्टी को हार का सामना करना पड़ा, जबकि गुजरात की मांजलपुर सीट पर जीत दर्ज कर उसने अपना गढ़ बचाए रखा। तीन सीटों में दो पर हार के बाद पार्टी के भीतर राजनीतिक मंथन तेज होने की चर्चा है।
बांकीपुर में बदला तीन दशक का राजनीतिक इतिहास
बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर भाजपा को बड़ा झटका लगा है। यह वही सीट रही है जहां से पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन लगातार करीब 20 वर्षों तक विधायक रहे। उनसे पहले उनके पिता नवीन किशोर सिन्हा लगभग 11 वर्षों तक इस सीट का प्रतिनिधित्व कर चुके थे। इस तरह करीब 30 वर्षों से कायम भाजपा का राजनीतिक वर्चस्व इस उपचुनाव में समाप्त हो गया। मतगणना के 28 राउंड के बाद पीके 19 हजार से अधिक मतों की बढ़त बनाए हुए हैं।
दतिया में कांग्रेस की वापसी, भाजपा को बड़ा नुकसान
मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर भी भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता घनश्याम सिंह ने पीछे छोड़ दिया। 72 वर्षीय घनश्याम सिंह इससे पहले दो बार विधायक रह चुके हैं। यह सीट पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा के प्रभाव क्षेत्र के रूप में भी चर्चित रही है। 15 राउंड की मतगणना में 14 राउंड पूरे होने तक घनश्याम सिंह 7,531 मतों की बढ़त बनाए हुए थे, जिसके बाद उनकी जीत लगभग तय मानी गई।
गुजरात की मांजलपुर सीट पर भाजपा ने बचाया अपना गढ़
गुजरात की मांजलपुर विधानसभा सीट पर भाजपा ने लगातार नौवीं बार जीत दर्ज की। पार्टी उम्मीदवार सतीश पटेल ने 30,630 मतों के अंतर से जीत हासिल की। यह सीट भाजपा विधायक योगेश पटेल के निधन के बाद रिक्त हुई थी। वर्ष 2008 के परिसीमन के बाद इस सीट का नाम रावपुरा से बदलकर मांजलपुर किया गया था और तब से यह भाजपा का मजबूत गढ़ बनी हुई है।
जीत मिली, लेकिन घटा जीत का अंतर
हालांकि मांजलपुर सीट पर भाजपा ने जीत बरकरार रखी, लेकिन जीत का अंतर पहले की तुलना में काफी कम रहा। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में योगेश पटेल ने करीब एक लाख मतों के अंतर से जीत दर्ज की थी, जबकि इस बार यह अंतर घटकर लगभग 30 हजार मतों तक सीमित रह गया। योगेश पटेल क्षेत्र में ‘काका’ के नाम से लोकप्रिय थे और उनके निधन के बाद पार्टी ने सतीश पटेल को उम्मीदवार बनाया।
उपचुनाव के नतीजों से बढ़ी राजनीतिक हलचल
तीनों विधानसभा सीटों के परिणामों ने भाजपा के सामने अलग-अलग संदेश रखे हैं। गुजरात में पार्टी ने अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखी, लेकिन बिहार और मध्य प्रदेश में मिली हार ने संगठन और नेतृत्व के सामने नई राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि इन दोनों राज्यों में मिली हार के बाद पार्टी आगे क्या रणनीति अपनाती है।
